Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Mirza Ghalib Shayari in Hindi

हेल्लो दोस्तों आज हम आपके लिए मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी लेकर आये है जोकि आपको बहुत ज्यादा पसंद आये गी अगर आप भी मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी पढने के सोकिन है तो हमारे साथ बने रहिये गा क्योकि आज की ये शायरी मिर्ज़ा ग़ालिब के द्वारा लिखी गई है जोकि आपको पसंद आये गी तो फिर चलिए शरु करते है और एक – एक कर के पढना शरु करते है.

Ghalib Shayari in Hindi

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है!
अपने जी में हमने ठानी और है!

आतिश -ऐ -दोज़ख में ये गर्मी कहाँ!
सोज़-ऐ -गम है निहानी और है!!

Mirza Ghalib Shayari Collection in Hindi

‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइ’ज़ बुरा कहे!
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे!!

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल!
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !!

Mirza Ghalib Shayari in Hindi 2 Lines

जो कुछ है महव-ए-शोख़ी-ए-अबरू-ए-यार है!
आँखों को रख के ताक़ पे देखा करे कोई.!

सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है!
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है!
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा!
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है!!

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं!
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है!
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब!
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है!!

चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत!
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!!

Ghalib Shayari On Love in Hindi

बारह देखीं हैं उन की रंजिशें!
पर कुछ अब के सरगिरानी और है !

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे!
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये!!

नसीहत के कुतुब-ख़ाने* यूँ तो दुनिया में भरे हैं!
ठोकरें खा के ही अक्सर बंदे को अक़्ल आई है !!

ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है!
हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमाँ क्यूँ हो!!

कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को!
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता!!

ता फिर न इंतिज़ार में नींद आए उम्र भर!
आने का अहद कर गए आए जो ख़्वाब में !!

Best Shayari Of Mirza Ghalib in Hindi

क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं!
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ!!

सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है!
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है!
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा!
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है!!

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब!!
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये!!

समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल!
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहिये!

तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल!!
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये!!

Mirza Ghalib Shayari hindi

देके खत मुँह देखता है नामाबर!
कुछ तो पैगाम -ऐ -ज़बानी और है !

अपनी गली में मुझ को!
न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल!!
मेरे पते से ख़ल्क़ को!
क्यूँ तेरा घर मिले!
गा़लिब!!

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक!!
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक!!

कुछ लम्हे हमने ख़र्च किए थे मिले नही!!
सारा हिसाब जोड़ के सिरहाने रख लिया !!

भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी!!
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया !!

हमे उम्मीद है आपको ये mirza ghalib Shayari पसंद आई है इसी प्रकार से हिंदी शायरी पढने के लिए हमारे साथ बने रहिये गा क्योकि हम आपके लिय शायरी लेकर आते रहते है आज के इए इतना ही धन्यवाद!!

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